My Passion
It's ur luck to love someone. It's ur fortune to love the one who loves u... but it's a miracle to love a person who can't love anyone except you.....

Saturday, April 16, 2011
Sunday, April 3, 2011
I LOVE YOU......
When I found you
I found a blessing
I found an angel
Like a dream come true
...When I found you
I found my heart
I found it struck
By Cupid's dart
When I found you
I found pure bliss
I found heaven
Deep in your in kiss
When I found you
I found my soul
I found your love
That made me whole
When I found you
I found my dreams
I found out what
Love really means
When I found you
I found a lot
I found true love which
Fulfilled my Dreams.
I LOVE YOU :)
Wednesday, March 2, 2011
I write poetry to soothe my pain
I write poetry to soothe my pain
Because all the world just seems the same
This twisting, burning, breaking
All because of one little game
What you said to me.
How you hurt me so.
The cut is just too deep.
Emptiness scereing into my heart.
I want to know why...
This pain inside me,
Just will not stop.
The burning, breaking pain.
The cut you left is hard to heal
And i cant seem to stop the bleeding.
I hope you are happy now.
With the pain you made me feel.
Saturday, February 5, 2011
मैंने तो बहुत चाहा मगर वो मिला ही नहीं,
लाख कोशिश की मगर फासला मिटा ही नहीं,
उसको मजबूर ज़माने ने इस कदर कर दिया कि,
मेरी किसी सदा पर वो ठहरा ही नहीं,
खुदा से झोली फैला के माँगा था उसे,
...खुदा ने मेरी किसी दुआ को सुना ही नहीं,
हर एक से पुछा सबब उसके ना मिलने का,
हर एक ने कहा वो तेरे लिए बना ही नहीं..........
Saturday, January 29, 2011
इश्क में होश नहीं है
इश्क में होश नहीं है
की कहाँ पे हूँ मैं
या तो है चाँद जमीन पे
या आसमान में हूँ मैं
इश्क में होश नहीं है
मुझको मालुम नहीं दिन कब निकलता है
मुझको मालुम नहीं रात कैसे ढलती है
ये सुबह शाम है क्या कुछ पता ही नहीं
ज़िन्दगी ख्वाबो में निकलती है
मुझको छुते हैं सितारे ये किस जगह पे हूँ मैं
या तो है चाँद जमीन पे
या आसमान में हूँ मैं
दिल किसी दर्द किसी ग़म से वाकिफ ही नहीं
मैं शिकायत भी करूँ तो ये वाजिब ही नहीं
मैं जहाँ हूँ बस वही मंजिल
माना किसी शर्त पे वापिस ही नहीं
ज़र्रे ज़र्रे में इश्क है हाँ उस जहां में हूँ मैं
या तो है चाँद जमीन पे
या आसमान में हूँ मैं
इश्क में होश नहीं है
की कहाँ पे हूँ मैं.......................
की कहाँ पे हूँ मैं
या तो है चाँद जमीन पे
या आसमान में हूँ मैं
इश्क में होश नहीं है
मुझको मालुम नहीं दिन कब निकलता है
मुझको मालुम नहीं रात कैसे ढलती है
ये सुबह शाम है क्या कुछ पता ही नहीं
ज़िन्दगी ख्वाबो में निकलती है
मुझको छुते हैं सितारे ये किस जगह पे हूँ मैं
या तो है चाँद जमीन पे
या आसमान में हूँ मैं
दिल किसी दर्द किसी ग़म से वाकिफ ही नहीं
मैं शिकायत भी करूँ तो ये वाजिब ही नहीं
मैं जहाँ हूँ बस वही मंजिल
माना किसी शर्त पे वापिस ही नहीं
ज़र्रे ज़र्रे में इश्क है हाँ उस जहां में हूँ मैं
या तो है चाँद जमीन पे
या आसमान में हूँ मैं
इश्क में होश नहीं है
की कहाँ पे हूँ मैं.......................
Wednesday, January 26, 2011
तेरे प्यार में
तेरी हर एक मुस्कान के कायल हैं हम
तेरी हर ख़ुशी के लिए पागल हैं हम
कैसे कह दें ज़माने से कि तेरे प्यार में पागल हैं हम
ये ज़माने वाले तो कहते हैं कि दीवाने हैं हम |
ज़माने के डर से प्यार कम नहीं करेंगे हम
जमाना चाहे कुछ भी कहे प्यार करते रहेंगे हम
बस तुम मेरे साथ रहना ऐ हसीं
तुम साथ रहीं तो ज़माने से लड़ लेंगे हम |
तुम जो ना होती तो कहाँ दिल लगाते हम
दिल की बगिया सूनी रहती और अकेले रहते हम
तुम मिल गयी हो तो मिल गया है ये जहां
दिल की बगिया भी भर गयी खुश्बू से
और आबाद हो गए हम |
तेरी हर ख़ुशी के लिए पागल हैं हम
कैसे कह दें ज़माने से कि तेरे प्यार में पागल हैं हम
ये ज़माने वाले तो कहते हैं कि दीवाने हैं हम |
ज़माने के डर से प्यार कम नहीं करेंगे हम
जमाना चाहे कुछ भी कहे प्यार करते रहेंगे हम
बस तुम मेरे साथ रहना ऐ हसीं
तुम साथ रहीं तो ज़माने से लड़ लेंगे हम |
तुम जो ना होती तो कहाँ दिल लगाते हम
दिल की बगिया सूनी रहती और अकेले रहते हम
तुम मिल गयी हो तो मिल गया है ये जहां
दिल की बगिया भी भर गयी खुश्बू से
और आबाद हो गए हम |
प्रेम
प्रेम
ऊपर देखो तो आकाश सा विशाल
नीचे देखो तो धरा सा सहनशील
चलो तो मार्गदर्शन करे
पा जाओ तो मंजिल सा लगे
दूसरों को जान सको या
किसी के दिल में बस सको तो वो है प्रेम
अब मेरी अपनी प्रेम कहानी मेरी जुबानी....
वो पहली बार का मिलना
उसके चेहरे पर एक अनजानी सी परेशानी
मेरे दिल में थी उसकी कोई निशानी
फिर फिर याद आई वो बचपन कहानी
साथ में खेलना
छोटी छोटी बातों पर रूठना
फिर अचानक से हंस देना
फिर फिर याद आई वो बचपन कहानी
फिर उससे बढा मिलना जुलना
नजदीकियों का और बढ़ना
निगाहों का मिलना और
हौले से दिल का धड़कना
शायद यही है प्रेम.......
ऊपर देखो तो आकाश सा विशाल
नीचे देखो तो धरा सा सहनशील
चलो तो मार्गदर्शन करे
पा जाओ तो मंजिल सा लगे
दूसरों को जान सको या
किसी के दिल में बस सको तो वो है प्रेम
अब मेरी अपनी प्रेम कहानी मेरी जुबानी....
वो पहली बार का मिलना
उसके चेहरे पर एक अनजानी सी परेशानी
मेरे दिल में थी उसकी कोई निशानी
फिर फिर याद आई वो बचपन कहानी
साथ में खेलना
छोटी छोटी बातों पर रूठना
फिर अचानक से हंस देना
फिर फिर याद आई वो बचपन कहानी
फिर उससे बढा मिलना जुलना
नजदीकियों का और बढ़ना
निगाहों का मिलना और
हौले से दिल का धड़कना
शायद यही है प्रेम.......
Subscribe to:
Posts (Atom)